अल्मोड़ा

अल्मोड़ा में खाद्य सुरक्षा विभाग का बड़ा एक्शन: लोधिया बैरियर पर सघन चेकिंग, संदिग्ध मावा और मिठाइयों के नमूने सील

मुख्य संपादक · 14 फ़रवरी 2026 | 03:34 pm

Khadya
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अल्मोड़ा। उत्तराखंड में मिलावटखोरों के खिलाफ प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है। खाद्य आयुक्त उत्तराखंड और जिलाधिकारी अल्मोड़ा के सख्त निर्देशों के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने आज सुबह से ही जनपद की सीमाओं पर मोर्चा संभाल लिया। बाहरी जिलों से अल्मोड़ा की ओर आ रही खाद्य सामग्री की शुद्धता जांचने के लिए लोधिया पुलिस बैरियर पर एक विशेष अभियान चलाया गया। इस दौरान टीम ने 16 से अधिक वाहनों की बारीकी से तलाशी ली, जिसमें संदिग्ध पाए गए मावे और पैकेट बंद मिठाइयों के सैंपल भरकर जांच के लिए लैब भेज दिए गए हैं। विभाग की इस कार्रवाई से खाद्य सामग्री के थोक व्यापारियों और सप्लायरों में हड़कंप मचा हुआ है।

अभियान का पूरा घटनाक्रम और पृष्ठभूमि

यह कार्रवाई महज एक सामान्य निरीक्षण नहीं थी, बल्कि एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा थी। सुबह तड़के जब बाहरी जिलों से मालवाहक गाड़ियां और बसें जनपद में प्रवेश कर रही थीं, तभी खाद्य सुरक्षा अधिकारी विपिन कुमार के नेतृत्व में टीम ने लोधिया बैरियर पर नाकाबंदी कर दी। टीम ने विशेष रूप से उन वाहनों को लक्षित किया जो हल्द्वानी, रुद्रपुर और अन्य मैदानी इलाकों से दूध से बने उत्पाद और मिठाइयां लेकर आ रहे थे।

जांच के दायरे में केएमयू की बसें, बड़े ट्रक और छोटे कमर्शियल वाहन रहे। अधिकारियों ने वाहनों के भीतर रखे सामान की न केवल भौतिक स्थिति देखी, बल्कि उनके रख-रखाव के तरीकों की भी जांच की। इसी दौरान एक बस की छत और डिग्गी में रखे मावे की खेप को देखकर टीम को संदेह हुआ। मावे की गंध और बनावट मानक के अनुरूप न लगने पर तत्काल मौके पर ही नमूने लेने की प्रक्रिया शुरू की गई।

संदेह के घेरे में मावा और पैकेट बंद मिठाइयां

निरीक्षण के दौरान टीम को दो प्रमुख मामलों में बड़ी सफलता मिली। पहला मामला एक यात्री बस का है, जिसमें खुले में भारी मात्रा में मावा लाया जा रहा था। इस मावे की गुणवत्ता संदिग्ध प्रतीत होने पर विधिक प्रक्रिया के तहत नमूना सील किया गया।

दूसरा मामला एक अन्य वाहन का था, जिसमें विभिन्न प्रकार की रंगीन और पैकेट बंद मिठाइयां सप्लाई की जा रही थीं। इन मिठाइयों के निर्माण की तिथि, एक्सपायरी और उनमें इस्तेमाल किए गए रंगों की प्रामाणिकता संदिग्ध लगने पर उनके भी सैंपल लिए गए। खाद्य सुरक्षा अधिकारी विपिन कुमार के साथ ईश्वर सिंह नेगी और कुंदन सिंह ने इन सभी नमूनों को सील कर राजकीय खाद्य विश्लेषणशाला भेजने की तैयारी पूरी कर ली है।

जनता और पाठकों पर इस कार्रवाई का प्रभाव

प्रशासन की इस मुस्तैदी का सीधा असर आम जनता के विश्वास पर पड़ता है। अक्सर त्योहारों या विशेष सीजन के दौरान मैदानी क्षेत्रों से भारी मात्रा में मिलावटी मावा पहाड़ों की ओर भेजा जाता है। ऐसे में लोधिया जैसे मुख्य प्रवेश द्वार पर सख्ती होने से मिलावटखोरों के हौसले पस्त होते हैं। पाठकों के लिए यह खबर एक आश्वासन की तरह है कि उनकी थाली तक पहुँचने वाली चीज़ों पर प्रशासन की पैनी नज़र है। इसके अलावा, स्थानीय दुकानदारों में भी यह संदेश गया है कि यदि वे घटिया सामग्री बेचते पकड़े गए, तो उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई निश्चित है।

क्या होगा अगला कदम?

खाद्य सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहेगी। लिए गए नमूनों की रिपोर्ट आने में कुछ समय लगता है। जैसे ही प्रयोगशाला से रिपोर्ट प्राप्त होगी, यदि नमूने फेल (अमानक या असुरक्षित) पाए जाते हैं, तो खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की विभिन्न धाराओं के तहत संबंधित विक्रेताओं और सप्लायरों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी। इसमें भारी जुर्माने से लेकर जेल तक का प्रावधान है। आगामी दिनों में टीम अन्य प्रवेश द्वारों जैसे मोहान, क्वारब और भिकियासैंण क्षेत्रों में भी इसी तरह के औचक निरीक्षण करेगी।

आम आदमी के लिए क्या है इसमें खास?

इस खबर का सबसे महत्वपूर्ण पहलू उपभोक्ताओं की सेहत और उनकी जेब से जुड़ा है। जब विभाग ऐसे अभियान चलाता है, तो बाजार में कृत्रिम रूप से तैयार किए गए घातक रसायनों वाले उत्पादों की आमद कम हो जाती है। आम उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे खरीदारी करते समय लेबल और शुद्धता की जांच अवश्य करें। इसके साथ ही, विभाग की इस सख्ती से स्थानीय डेयरी संचालकों को भी बढ़ावा मिलता है, क्योंकि मिलावटी बाहरी माल के रुकने से शुद्ध उत्पादों की मांग बढ़ती है।

निष्कर्ष: जनहित सर्वोपरि

खाद्य सुरक्षा अधिकारी विपिन कुमार ने सभी कारोबारियों, सप्लायरों और वितरकों को कड़ी चेतावनी देते हुए अपील की है कि वे बिना पक्के बिल और वैध दस्तावेजों के किसी भी खाद्य सामग्री का लेन-देन न करें। पारदर्शिता ही इस व्यवसाय का आधार होनी चाहिए।

निष्कर्षतः, अल्मोड़ा प्रशासन की यह पहल जनहित में एक सराहनीय कदम है। मिलावट के इस काले कारोबार को जड़ से खत्म करने के लिए केवल विभागीय टीम ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज को भी जागरूक होना होगा। यदि आपको भी कहीं मिलावट का संदेह हो, तो तत्काल इसकी सूचना जिला प्रशासन या खाद्य सुरक्षा विभाग को देनी चाहिए।

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