अस्पतालों से रेफर होने वाले केसों पर प्रशासन सख्त: गर्भवती महिलाओं की एक माह पूर्व से होगी सघन मॉनिटरिंग
मुख्य संपादक20 जनवरी 2026 | 11:36 PM

अल्मोड़ा। स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और अस्पतालों से मरीजों को उच्च केंद्रों पर रेफर किए जाने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए जिलाधिकारी अंशुल सिंह की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। नवगठित ‘रेफरल कमेटी’ की इस बैठक में स्वास्थ्य केंद्रों से भेजे गए मामलों की गहराई से पड़ताल की गई। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सेवाओं में संवेदनशीलता और पूर्व-तैयारी ही जीवन बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है।
प्रसव से एक माह पहले शुरू होगी विशेष निगरानी
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्देश प्रसव (डिलीवरी) से संबंधित मामलों को लेकर रहा। जिलाधिकारी ने आदेश दिया है कि गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी की संभावित तिथि (EDD) से कम से कम एक महीने पहले ही उनकी नियमित मॉनिटरिंग शुरू कर दी जाए। इसके लिए ब्लॉक और स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर एक विस्तृत डेटा बैंक तैयार किया जाएगा।
इस योजना के तहत 7 से 9 माह की गर्भावस्था वाली महिलाओं की पहचान कर उनकी संभावित डिलीवरी तिथि का अद्यतन (Updated) डेटा रिकॉर्ड में रखा जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रसव के समय किसी भी आपात स्थिति के लिए स्वास्थ्य केंद्र और परिवार पहले से मानसिक और चिकित्सीय रूप से तैयार रहें।
आशा और एएनएम की निगरानी में रहेंगे हाई-रिस्क मामले
जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि वे गर्भवती महिलाओं का नियमित भ्रमण करें और विशेष रूप से उन मामलों की पहचान करें जिनमें जोखिम (High Risk) की संभावना अधिक है। ऐसी महिलाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग की जाएगी ताकि समय रहते उन्हें आवश्यक उपचार मिल सके और रेफरल की नौबत कम आए।
अस्पताल प्रबंधन और फॉलोअप पर जोर
जिलाधिकारी ने अस्पताल प्रबंधन को और अधिक सुदृढ़ करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी संभावित जटिल केस से पहले ही स्वास्थ्य केंद्र को पूरी तरह तैयार रहना चाहिए। इसके साथ ही, रेफर किए गए मरीजों के ‘फॉलोअप स्टेटस’ की भी नियमित समीक्षा की जाएगी। यह देखा जाएगा कि रेफर होने के बाद मरीज की स्थिति में क्या सुधार हुआ और उसे आगे क्या उपचार मिला।
मृत्यु दर की समीक्षा के लिए बनेगा एक्सपर्ट पैनल
शिशु मृत्यु दर (IMR) और मातृ मृत्यु दर (MMR) पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। बैठक में निर्देश दिए गए कि इनसे संबंधित सटीक डेटा तैयार किया जाए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी परिस्थिति में मृत्यु होती है, तो उस मामले की एक्सपर्ट पैनल से विस्तृत जांच कराई जाएगी। यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं की खामियों को दूर करने और जवाबदेही तय करने के लिए उठाया गया है।
बैठक में अधिकारियों की उपस्थिति
इस समीक्षा बैठक में प्रभारी मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ अरविंद पांगती और पीएमएस जिला चिकित्सालय डॉ एचसी गड़कोटी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे। वहीं, सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारियों ने वर्चुअल माध्यम से बैठक में हिस्सा लिया और अपने-अपने क्षेत्रों की प्रगति रिपोर्ट साझा की।
निष्कर्ष: पाठक और जनता के लिए इसका महत्व
प्रशासन की इस सक्रियता का सीधा उद्देश्य आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना है। डिलीवरी से एक महीने पहले मॉनिटरिंग शुरू होने से प्रसव के दौरान होने वाले खतरों को कम किया जा सकेगा। साथ ही, एक्सपर्ट पैनल द्वारा जांच और रेफरल कमेटी की समीक्षा से अस्पतालों की कार्यप्रणाली में सुधार आएगा, जिससे मरीजों को अनावश्यक रेफरल की परेशानी से मुक्ति मिलेगी।
संबंधित ख़बरें

अल्मोड़ा में नर्सिंग ऑफिसर भर्ती परीक्षा की तैयारियां पूरी, 589 परीक्षार्थी होंगे शामिल
23 जुलाई 2026 | 07:23 PM

अल्मोड़ा में सड़क सुरक्षा टास्क फोर्स की बैठक: जिलाधिकारी ने दिए दुर्घटना संभावित स्थलों पर सुधार के निर्देश
23 जुलाई 2026 | 07:12 PM

अल्मोड़ा में कांग्रेस और युवा कांग्रेस का प्रदर्शन, दिल्ली घटना के विरोध में निकाला जुलूस
22 जुलाई 2026 | 06:14 PM

अल्मोड़ा: दन्या पुलिस ने गांधी इंटर कॉलेज पनुवानौला में चलाया जन जागरूकता अभियान
21 जुलाई 2026 | 07:18 PM