देहरादून

उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट, 4 और 5 जुलाई को कई जिलों में सतर्कता की अपील

गीता जोशी (संपादक) · 4 जुलाई 2026 | 06:35 pm

उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट, 4 और 5 जुलाई को कई जिलों में सतर्कता की अपील
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देहरादून: उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर सक्रिय दिखाई दे रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग, देहरादून द्वारा जारी जिला स्तरीय मौसम पूर्वानुमान के अनुसार 4 और 5 जुलाई 2026 को राज्य के कई जिलों में भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना जताई गई है। इसके साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों में गरज-चमक, आकाशीय बिजली और तेज से अत्यंत तेज वर्षा को लेकर भी चेतावनी जारी की गई है।

मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए प्रशासन और आमजन को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों, चारधाम यात्रियों, नदी-नालों के आसपास रहने वाले नागरिकों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से सावधानी बरतने की अपील की गई है।

4 जुलाई को इन जिलों में भारी बारिश की संभावना

मौसम विभाग के अनुसार 4 जुलाई को पौड़ी, चंपावत, नैनीताल, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों में कहीं-कहीं भारी वर्षा होने की संभावना है। इन जिलों के साथ ही राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और तेज बारिश के दौर देखने को मिल सकते हैं।

लगातार बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क मार्गों पर मलबा आने, भूस्खलन, चट्टान गिरने और नदी-नालों के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी जैसी स्थितियां बन सकती हैं। ऐसे में लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम की स्थिति को देखकर ही आवाजाही करने की सलाह दी गई है।

5 जुलाई को बारिश का असर और बढ़ने की संभावना

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 5 जुलाई को नैनीताल और बागेश्वर जिलों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है। इसके अलावा देहरादून, टिहरी, चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चंपावत और पिथौरागढ़ जिलों में भी कहीं-कहीं भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया गया है।

पर्वतीय जिलों में गरज-चमक के साथ अत्यंत तीव्र वर्षा और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना बनी रह सकती है। वहीं हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर जिलों में भी कुछ स्थानों पर गरज-चमक और बिजली गिरने को लेकर सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

भारी बारिश से ये असर देखने को मिल सकते हैं

लगातार और तेज बारिश के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हो सकता है। मौसम विभाग और प्रशासन की चेतावनी को देखते हुए लोगों को संभावित जोखिमों से सावधान रहने की जरूरत है।

  • भूस्खलन, मलबा आने और चट्टान गिरने की घटनाएं हो सकती हैं।
  • राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर यातायात बाधित हो सकता है।
  • नदी, नालों और गदेरों का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है।
  • निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है।
  • बिजली, पेयजल और संचार सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
  • कृषि और बागवानी फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका रह सकती है।
  • चारधाम यात्रा और हेलीकॉप्टर सेवाओं पर मौसम का असर पड़ सकता है।

यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए जरूरी सलाह

मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि अगले दो दिनों तक मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही यात्रा करें। पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश के दौरान सड़क मार्ग अचानक अवरुद्ध हो सकते हैं, इसलिए यात्रा से पहले स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की ताजा जानकारी जरूर प्राप्त करें।

  • अनावश्यक यात्रा से बचें।
  • भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतें।
  • नदी, नालों और गदेरों के किनारे जाने से बचें।
  • खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े न हों।
  • बिजली चमकने के दौरान सुरक्षित स्थान पर रहें।
  • चारधाम यात्रा या पर्वतीय यात्रा पर निकलने से पहले मौसम की ताजा जानकारी लें।
  • स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

प्रशासनिक सतर्कता और आमजन की जिम्मेदारी

उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में मानसून के दौरान मौसम अचानक बदल सकता है। कई स्थानों पर थोड़े समय में तेज बारिश होने से सड़क, नदी-नालों और ढलान वाले क्षेत्रों में जोखिम बढ़ जाता है। ऐसे में प्रशासनिक सतर्कता के साथ-साथ आमजन की सावधानी भी बेहद जरूरी है।

लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों से बचें और केवल मौसम विभाग, जिला प्रशासन तथा आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। किसी भी आपात स्थिति में तुरंत स्थानीय प्रशासन, पुलिस या आपदा कंट्रोल रूम से संपर्क करें।

निष्कर्ष

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार उत्तराखंड में 4 और 5 जुलाई को कई जिलों में भारी बारिश, गरज-चमक और आकाशीय बिजली की संभावना बनी हुई है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने और प्रशासन द्वारा जारी एडवाइजरी का पालन करने की जरूरत है। पर्वतीय क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोग मौसम की ताजा जानकारी लेकर ही आगे बढ़ें।

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