देहरादून के सिल्वर सिटी मॉल में खूनी खेल, जिम से बाहर निकलते ही गैंगस्टर विक्रम की हत्या
मुख्य संपादक · 14 फ़रवरी 2026 | 10:45 am

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून एक बार फिर दिनदहाड़े हुई खूनी वारदात से थर्रा उठी है। राजपुर रोड स्थित प्रसिद्ध सिल्वर सिटी मॉल में शुक्रवार सुबह करीब 10:10 बजे झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर विक्रम शर्मा (51) की अज्ञात हमलावरों ने गोलियों से भूनकर हत्या कर दी। हमला तब हुआ जब विक्रम जिम से वर्कआउट कर बाहर निकल रहा था। इस घटना ने शहर की कानून व्यवस्था और सुरक्षित माने जाने वाले सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस प्रारंभिक जांच में इसे पुरानी रंजिश और गैंगवार से जोड़कर देख रही है।
घटनाक्रम: जिम से निकलते ही सिर में मारी गोली
प्राप्त जानकारी के अनुसार, झारखंड का रहने वाला और वर्तमान में देहरादून के अमन विहार में रह रहा विक्रम शर्मा राजपुर रोड स्थित सिल्वर सिटी मॉल के ‘एनी टाइम फिटनेस’ जिम का सदस्य था। शुक्रवार सुबह वह हमेशा की तरह व्यायाम करने गया था। जैसे ही वह जिम से बाहर निकलकर सीढ़ियों की ओर बढ़ा, घात लगाए बैठे दो हमलावरों ने उस पर हमला बोल दिया। हमलावरों ने बेहद करीब से विक्रम के सिर में गोली मार दी, जिससे वह वहीं लहूलुहान होकर गिर पड़ा।
वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर पैदल ही मॉल से बाहर निकले और कुछ दूरी पर खड़ी एक काली रंग की बाइक पर सवार होकर फरार हो गए। बताया जा रहा है कि बाइक पर उनका एक तीसरा साथी पहले से इंतजार कर रहा था। गंभीर हालत में विक्रम को तुरंत मैक्स अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप के अनुसार, पुलिस की कई टीमें हमलावरों की तलाश में जुट गई हैं और शहर भर में नाकेबंदी कर दी गई है।
अपराधी का लंबा इतिहास और काशीपुर कनेक्शन
मृतक विक्रम शर्मा कोई साधारण व्यक्ति नहीं था, बल्कि अपराध की दुनिया का एक बड़ा नाम था। वह मूल रूप से ऊधमसिंह नगर जिले के बाजपुर का निवासी था, लेकिन उसके पिता की नौकरी जमशेदपुर (झारखंड) में होने के कारण उसका आपराधिक साम्राज्य वहीं फैला। विक्रम पर हत्या, अपहरण और रंगदारी के 50 से अधिक मुकदमे दर्ज थे। वह झारखंड के कुख्यात अखिलेश सिंह गैंग का मुख्य रणनीतिकार और मास्टरमाइंड माना जाता था।
झारखंड पुलिस की सख्ती और प्रतिद्वंद्वी गैंग्स के डर से वह पिछले कुछ वर्षों से देहरादून में छिपकर रह रहा था। यहाँ उसने अपनी पहचान एक व्यवसायी के रूप में बना ली थी। काशीपुर में उसका स्टोन क्रशर का कारोबार था और वह प्रॉपर्टी डीलिंग के काम में भी सक्रिय था। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि हमले के वक्त विक्रम के पास उसकी लाइसेंसी पिस्टल मौजूद थी, लेकिन हमलावरों ने उसे संभलने का मौका ही नहीं दिया और वह अपनी रक्षा में हथियार नहीं निकाल पाया।
16 दिनों में पांचवीं हत्या: दून में बढ़ता अपराध ग्राफ
इस हत्याकांड ने देहरादून पुलिस के इकबाल पर बड़ा हमला बोला है। पिछले 16 दिनों के भीतर जिले में यह पांचवीं हत्या है, जिसने आम जनता में असुरक्षा का भाव पैदा कर दिया है:
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29 जनवरी: विकासनगर में छात्रा मनीषा तोमर की धारदार हथियार से हत्या।
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31 जनवरी: ऋषिकेश में प्रीति नामक महिला की गोली मारकर हत्या।
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02 फरवरी: देहरादून के दूल्हा बाजार में गुंजन की चापड़ से वार कर हत्या।
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11 फरवरी: राजधानी में कारोबारी अर्जुन की गोली मारकर हत्या।
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14 फरवरी: गैंगस्टर विक्रम शर्मा की दिनदहाड़े हत्या।
लगातार हो रही इन वारदातों से शहर के पॉश इलाकों में भी खौफ का माहौल है। विशेष रूप से मॉल और जिम जैसे सार्वजनिक स्थानों पर हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।
किराए के वाहनों का इस्तेमाल और साजिश के तार
पुलिस जांच में एक महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगा है। वारदात में इस्तेमाल की गई स्कूटी और बाइक हरिद्वार से किराए पर ली गई थी। गुरुवार को एक युवक ने ‘आकाश’ नाम से झारखंड का पता दर्ज करवाकर एक बाइक ली थी, जबकि शुक्रवार तड़के 4 बजे के करीब उसी आईडी पर एक स्कूटी भी किराए पर ली गई। यह साफ तौर पर दर्शाता है कि हत्या की साजिश पूरी प्लानिंग के साथ रची गई थी और हमलावरों को विक्रम की दिनचर्या की पूरी जानकारी थी।
जनता पर प्रभाव और आगे की राह
एक व्यस्त मॉल में सुबह के वक्त गोलीबारी होना आम नागरिकों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद चिंताजनक है। सिल्वर सिटी मॉल जैसे स्थानों पर परिवार और युवा बड़ी संख्या में आते हैं। इस घटना के बाद मॉल की सुरक्षा जांच और सीसीटीवी निगरानी को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं। पुलिस के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती न केवल इन हमलावरों को पकड़ना है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि उत्तराखंड अपराधियों की शरणस्थली या गैंगवार का मैदान न बने।
निष्कर्ष: जनहित का नजरिया
अपराधियों का अंत अक्सर इसी तरह खौफनाक होता है, लेकिन कानून व्यवस्था के नजरिए से यह घटना एक चेतावनी है। जब 50 मुकदमों वाला अपराधी राजधानी के बीचों-बीच सुरक्षित रह रहा हो और फिर सरेआम मारा जाए, तो यह पुलिस इंटेलिजेंस की विफलता को भी दर्शाता है। आम आदमी के लिए जरूरी है कि वह अपने आसपास संदिग्ध गतिविधियों और बिना वेरिफिकेशन के रह रहे लोगों के प्रति सतर्क रहे।
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