टैरिफ वॉर का धमाका: चांदी 3 लाख के पार, सोना भी अपने ऐतिहासिक शिखर पर
मुख्य संपादक · 20 जनवरी 2026 | 09:23 am

नई दिल्ली: वैश्विक राजनीति में आते बड़े बदलावों और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक टकरावों ने भारतीय सर्राफा बाजार में भूचाल ला दिया है। अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ते ‘टैरिफ वॉर’ और ग्रीनलैंड जैसे रणनीतिक मुद्दों पर छिड़ी खींचतान का सीधा असर आम आदमी की जेब और सुरक्षित निवेश के सबसे बड़े माध्यम—सोने और चांदी पर पड़ा है। सोमवार को भारतीय बाजार में चांदी की कीमतों ने 3 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर लिया, वहीं सोना भी अपने अब तक के सबसे ऊंचे शिखर पर जा पहुँचा है। यह उछाल केवल एक सामान्य मूल्य वृद्धि नहीं है, बल्कि यह बदलती विश्व व्यवस्था और आर्थिक असुरक्षा का एक बड़ा संकेत है।
बाजार का ताजा हाल: आसमान पर पहुँचे दाम
सर्राफा बाजार से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को चांदी की कीमतों में 10,000 रुपये प्रति किलोग्राम की भारी तेजी देखी गई। इस उछाल के बाद चांदी के भाव 3,02,600 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गए। इसी तरह, सोने की कीमतों में भी जबरदस्त तेजी दर्ज की गई है। सोना 1,900 रुपये प्रति 10 ग्राम महंगा होकर 1,48,100 रुपये के नए शिखर पर पहुँच गया।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी भविष्य के सौदों में भारी हलचल है। मार्च में आपूर्ति वाले चांदी के वायदा भाव करीब 6 प्रतिशत की तेजी के साथ 3.10 लाख रुपये के स्तर को छू रहे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि दिसंबर 2025 के अंत में चांदी की कीमत लगभग 2,35,701 रुपये थी, यानी महज कुछ हफ्तों में इसमें करीब 30 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है।
तेजी के पीछे के मुख्य कारण: क्यों सुलग रहा है बाजार?
बाजार विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों के अनुसार, इस अप्रत्याशित तेजी के पीछे तीन बड़े और स्पष्ट कारण हैं:
-
ट्रंप के टैरिफ और व्यापारिक युद्ध: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से यूरोपीय संघ के खिलाफ सख्त व्यापारिक रुख अपनाए जाने और ग्रीनलैंड को लेकर उपजे विवाद ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है। जब भी बड़े देशों के बीच ट्रेड वॉर (व्यापारिक युद्ध) की स्थिति बनती है, तो निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश की ओर भागते हैं, जिससे सोने-चांदी की मांग बढ़ती है।
-
केंद्रीय बैंकों की रणनीति: दुनिया भर के कई केंद्रीय बैंकों ने अपनी मुद्रा को मजबूती देने और जोखिम कम करने के लिए सोने के भंडार को बढ़ाना शुरू कर दिया है। जब केंद्रीय बैंक बड़ी मात्रा में सोना खरीदते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी सप्लाई कम हो जाती है और कीमतें बढ़ने लगती हैं।
-
औद्योगिक मांग में भारी वृद्धि: चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी का एक बड़ा कारण इसकी औद्योगिक मांग है। वर्तमान में ग्रीन एनर्जी, सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) सेक्टर में चांदी का बड़े पैमाने पर उपयोग हो रहा है। मांग की तुलना में आपूर्ति कम होने के कारण चांदी सोने से भी तेज गति से महंगी हो रही है।
आम आदमी और निवेशकों पर क्या होगा असर?
सोने और चांदी की इन कीमतों का सीधा प्रभाव भारतीय समाज और मध्यवर्गीय परिवारों पर पड़ने वाला है। भारत में सोना केवल निवेश का साधन नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं का हिस्सा है।
-
शादियों के बजट पर असर: सोने की कीमतों के 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम होने से शादियों का बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है। गहने बनवाना अब आम आदमी की पहुंच से बाहर होता जा रहा है।
-
मध्यम वर्ग के लिए निवेश की चुनौती: छोटी बचत के जरिए सोना खरीदने वाले लोगों के लिए अब निवेश करना कठिन होगा। हालांकि, जिन लोगों के पास पहले से सोना मौजूद है, उनकी संपत्ति की वैल्यू में बड़ा इजाफा हुआ है।
-
महंगाई का संकेत: चांदी की औद्योगिक मांग बढ़ने और इसके महंगे होने का सीधा असर इलेक्ट्रॉनिक्स सामान और सोलर पैनल की कीमतों पर भी पड़ सकता है, जिससे आने वाले समय में तकनीक और बिजली उपकरण महंगे हो सकते हैं।
आगे की राह: क्या कीमतें और बढ़ेंगी?
बाजार के जानकारों का मानना है कि जब तक भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता और व्यापारिक प्रतिबंधों की तलवार लटकी रहती है, तब तक कीमतों में गिरावट की संभावना कम है। डॉलर की मजबूती और वैश्विक अस्थिरता के बीच सोना और चांदी अभी कुछ और नए रिकॉर्ड बना सकते हैं।
निष्कर्ष के तौर पर, यह समय निवेशकों के लिए सतर्क रहने का है। हालांकि लंबी अवधि के लिए सोना और चांदी हमेशा सुरक्षित माने जाते हैं, लेकिन मौजूदा कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को देखते हुए नई खरीदारी सोच-समझकर ही की जानी चाहिए। जनता के लिए अब बचत के पुराने तरीकों पर पुनर्विचार करने और डिजिटल गोल्ड जैसे विकल्पों को तलाशने की जरूरत बढ़ गई है।
संबंधित ख़बरें

भारत की रेल क्रांति: पटरी पर दौड़ी पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन, जींद-सोनीपत के बीच हरित परिवहन का नया अध्याय
17 जुलाई 2026 | 12:44 pm

पद्म विभूषण तीजन बाई का निधन: पंडवानी की अमर आवाज़ हुई खामोश, भारतीय लोककला जगत ने खोया अनमोल रत्न
6 जुलाई 2026 | 12:10 pm

पश्चिम बंगाल: सुवेंदु अधिकारी कैबिनेट का पहला विस्तार कल 35 नए चेहरे लेंगे शपथ
31 मई 2026 | 08:35 pm

नैनीताल के मैदानी क्षेत्रों में बदला स्कूलों का समय, भीषण गर्मी के चलते लिया गया निर्णय
21 मई 2026 | 08:23 pm