देवभूमि उत्तराखंड

जल स्रोतों के संरक्षण और सारा परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा के लिए जिलाधिकारी के निर्देश

गीता जोशी (संपादक) · 15 अप्रैल 2026 | 05:48 pm

जल स्रोतों के संरक्षण और सारा परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा के लिए जिलाधिकारी के निर्देश
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चम्पावत: जिलाधिकारी मनीष कुमार की अध्यक्षता में जिला सभागार में स्प्रिंग एवं रिवर पुनरुद्धार प्राधिकरण (सारा) की समीक्षा बैठक संपन्न हुई। इस बैठक के दौरान जनपद में संचालित विभिन्न सारा परियोजनाओं, प्राकृतिक जल स्रोतों जैसे धारे और नौलों के संरक्षण के साथ-साथ जल स्रोतों के पुनर्जीवन कार्यों की वर्तमान प्रगति का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि जल संरक्षण से जुड़ी सभी योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए।

बैठक में डिप्टेश्वर, गौड़ी और कालसन भोलेश्वर जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने इन परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लेते हुए संबंधित विभागों को कार्यों में तेजी लाने के स्पष्ट निर्देश दिए। विशेष रूप से कालसन भोलेश्वर परियोजना के लिए स्वीकृत कुल धनराशि का सही उपयोग करने के लिए लघु सिंचाई और वन विभाग को जिम्मेदारी सौंपी गई। इन विभागों को निर्देशित किया गया कि वे निर्धारित बजट का गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध तरीके से व्यय सुनिश्चित करें ताकि परियोजना के उद्देश्यों को प्राप्त किया जा सके।

जिलाधिकारी ने डिप्टेश्वर क्षेत्र में छोटे-छोटे चेकडैमों के निर्माण पर बल दिया और इसके माध्यम से जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए एक प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने को कहा। इसके अतिरिक्त कालसन भोलेश्वर परियोजना और गौड़ी नदी संरक्षण कार्यक्रम के तहत चौकुनीबोरा, राकड़ीफूलारा, मुड़ियानी और खर्ककार्की क्षेत्रों में चल रहे कार्यों की गति बढ़ाने के निर्देश दिए गए। उन्होंने वर्षा आधारित नदी उपचार गतिविधियों को प्रोत्साहित करने पर विशेष बल दिया और चिन्हित कुल 83 नौलों एवं धारों के पुनर्जीवन के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार कर समयबद्ध कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा।

विकास और निर्माण कार्यों के दौरान क्षतिग्रस्त हुए पारंपरिक जल स्रोतों को लेकर भी जिलाधिकारी ने आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को ऐसे स्रोतों का चिन्हीकरण कर उनके पुनर्जीवन की दिशा में प्रभावी कदम उठाने को कहा। इसके साथ ही वन विभाग को निर्देशित किया गया कि वे जंगलों के भीतर उन जल स्रोतों की पहचान करें जहां वन्यजीव पानी पीने आते हैं। वहां जल संरक्षण संरचनाएं विकसित करने का सुझाव दिया गया ताकि वन्यजीवों को जंगल में ही पानी उपलब्ध हो सके और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में कमी लाई जा सके।

बैठक के अंत में वर्षा जल संरक्षण को प्राथमिकता देने के लिए सभी अधिशासी अधिकारियों को अपने-अपने कार्यक्षेत्र में आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी डॉ. जी. एस. खाती, जिला विकास अधिकारी दिनेश दिगारी, सहायक परियोजना निदेशक विम्मी जोशी, लघु सिंचाई के अधिशासी अभियंता विमल कुमार सूठा, एसडीओ वन सुनील कुमार और जिला उद्यान अधिकारी मोहित मल्ली सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

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