बागेश्वर

बाबा बागनाथ की पावन भूमि पर ऐतिहासिक उत्तरायणी मेले का भव्य शुभारंभ

मुख्य संपादक · 13 जनवरी 2026 | 05:02 pm

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बागेश्वर-बाबा बागनाथ की पावन भूमि पर आयोजित होने वाले ऐतिहासिक उत्तरायणी मेले का शुभारंभ उत्तराखंड सरकार के पशुपालन, दुग्ध विकास एवं कौशल विकास मंत्री सौरभ बहुगुणा ने दीप प्रज्वलित कर विधिवत रूप से किया। इस अवसर पर मंचासीन सभी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का बैज अलंकरण एवं शॉल ओढ़ाकर पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। शुभारंभ समारोह में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और मेलार्थी मौजूद रहे।

उत्तरायणी मेले के अवसर पर प्रदेश के  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्चुअल माध्यम से जनपदवासियों को उत्तरायणी, घुघुतिया पर्व एवं मकर संक्रांति की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि उत्तरायणी पर्व उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और सामाजिक एकता का प्रतीक है, जिसे संजोकर अगली पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

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मुख्यमंत्री ने बागेश्वर को पौराणिक, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उत्तरायणी मेला स्थानीय संस्कृति, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने मेले में आने वाले पर्यटकों के प्रति सौहार्दपूर्ण व्यवहार, स्वच्छता बनाए रखने और शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सूरजकुंड से मंडलसेरा बाइपास पुल निर्माण, मंडलसेरा कुंती नाले के निर्माण तथा सूरजकुंड क्षेत्र में घाट निर्माण की महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं।

प्रभारी मंत्री सौरभ बहुगुणा ने “बागनाथ की जय” के उद्घोष के साथ अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए जनपदवासियों को उत्तरायणी मेले की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि उत्तरायणी पर्व उत्तराखंड की आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक है तथा इस मेले में कुमाऊँ की समृद्ध लोक संस्कृति का जीवंत रूप देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि यह मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का भी माध्यम है।

उन्होंने बताया कि उत्तरायणी मेले के माध्यम से स्थानीय लोग स्टॉल लगाकर अपनी आर्थिकी को सुदृढ़ करते हैं और पारंपरिक उत्पादों को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने कहा कि जनपद में कीवी उत्पादन निरंतर बढ़ रहा है, जिसे क्लस्टर मॉडल के माध्यम से और सशक्त किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी घोषणा की कि जिस दिन दुग्ध उत्पादन निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचेगा, उस दिन बागेश्वर दुग्ध संघ की स्थापना की जाएगी। इस दौरान प्रभारी मंत्री ने मेले में लगाए गए विभिन्न विभागीय एवं स्थानीय उत्पादों के स्टालों का निरीक्षण भी किया।

जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे ने सभी जनपदवासियों को उत्तरायणी मेले की बधाई देते हुए कहा कि यह मेला हमारी सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखने का माध्यम है। उन्होंने लोगों से सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लेने और इन पलों को स्मृतियों में संजोने की अपील की।

कार्यक्रम के दौरान अनेक मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिन्हें दर्शकों ने खूब सराहा। लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक वेशभूषा में प्रस्तुत कलाकारों ने पूरे वातावरण को सांस्कृतिक रंगों से भर दिया।


मेले के दौरान सुरक्षा, स्वच्छता और यातायात व्यवस्था को लेकर प्रशासन द्वारा विशेष इंतजाम किए गए हैं। पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी लगातार मेले क्षेत्र में निगरानी कर रहे हैं, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था उत्पन्न न हो और श्रद्धालु व पर्यटक सुरक्षित माहौल में मेले का आनंद ले सकें।

उत्तरायणी मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह स्थानीय संस्कृति, लोक परंपराओं और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का भी महत्वपूर्ण अवसर है। हर वर्ष की तरह इस बार भी यह मेला बागेश्वर की पहचान और गौरव को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का माध्यम बन रहा है।

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