देवभूमि उत्तराखंड

चम्पावत के 20 दूरस्थ गांवों को मिलेगी सड़क सुविधा, केंद्र सरकार से मिली स्वीकृति

गीता जोशी (संपादक) · 13 जून 2026 | 06:59 am

चम्पावत के 20 दूरस्थ गांवों को मिलेगी सड़क सुविधा, केंद्र सरकार से मिली स्वीकृति
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चम्पावत: जनपद के सीमांत क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विकासखंड पाटी और बाराकोट के 20 दूरस्थ गांवों को सड़क संपर्क से जोड़ने की तैयारी की गई है। राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना विकास एजेंसी (NRIDA), भारत सरकार द्वारा इस परियोजना के प्रथम चरण के लिए स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों और जिलाधिकारी मनीष कुमार के समन्वय से इन क्षेत्रों में सड़क नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है।

सड़क सुविधा उपलब्ध होने से इन गांवों के निवासियों को शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और व्यापार जैसी बुनियादी सेवाओं तक पहुंचने में सुगमता होगी। परिवहन के बेहतर साधन मिलने से स्थानीय ग्रामीणों को अपने कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा। लंबे समय से सड़क मार्ग से वंचित रहे इन क्षेत्रों के लिए यह परियोजना आवागमन के नए मार्ग खोलेगी।

विकासखंड पाटी के अंतर्गत आने वाले जिन 16 गांवों को सड़क से जोड़ा जाएगा, उनमें बसानजोगा, बसवारी, भिंगराड़ा, बिनवाल गांव, चौराकोट, धौंराग, कमलेख, करौली, मंगललेख, मौलानजाख, मौनकांडा, मुलाकोट, परेवा, पाटनगांव, तोलारंकुरी और वालिक शामिल हैं। इन गांवों में सड़क निर्माण के बाद आवागमन की स्थिति में सुधार होगा और स्थानीय लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।

इसी प्रकार विकासखंड बाराकोट के बैरा बडवाल, बलसो, बंतोली और काकड़ी गांवों को भी सड़क सुविधा से जोड़ने की दिशा में कार्य शुरू किया जाएगा। इन सड़कों के निर्माण से सीमांत गांवों में वर्षभर सुरक्षित और सुगम परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित हो सकेगी। सड़क संपर्क बढ़ने से क्षेत्र में पर्यटन, कृषि और स्वरोजगार की गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।

जिलाधिकारी मनीष कुमार ने बताया कि जनपद के दूरस्थ और सीमांत क्षेत्रों को सड़क संपर्क से जोड़ना प्रशासन की मुख्य प्राथमिकताओं में से एक है। सड़क केवल आवागमन का साधन ही नहीं है, बल्कि यह विकास, शिक्षा और रोजगार का मुख्य आधार भी है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद वर्षों से सड़क की प्रतीक्षा कर रहे ग्रामीणों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आएगा। सरकार के विजन के अनुरूप अंतिम छोर पर बसे गांवों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने के प्रयास निरंतर किए जा रहे हैं।

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