देवभूमि उत्तराखंड

हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद प्रकरण में बड़ा एक्शन, पूर्व नगर आयुक्त पर बर्खास्तगी की संस्तुति

गीता जोशी (संपादक) · 19 जून 2026 | 07:35 pm

हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद प्रकरण में बड़ा एक्शन, पूर्व नगर आयुक्त पर बर्खास्तगी की संस्तुति
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हरिद्वार: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति का पालन करते हुए हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद प्रकरण में प्रमुख कार्रवाई की है। इस मामले में तत्कालीन नगर आयुक्त हरिद्वार नगर निगम वरुण चौधरी को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त करने की संस्तुति की गई है। इसके साथ ही, तत्कालीन जिलाधिकारी हरिद्वार कर्मेंद्र सिंह को अपने आधिकारिक कर्तव्यों के उचित निर्वहन में गंभीर लापरवाही बरतने का दोषी मानते हुए उनके विरुद्ध बड़ी शास्ति (मेजर पनिशमेंट) अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है। इन दोनों अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने हेतु कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को संबंधित संस्तुति प्रेषित की जा रही है।

इसके अतिरिक्त, प्रकरण के समय कार्यरत उप-जिलाधिकारी (एसडीएम) अजयवीर सिंह के विरुद्ध भी कार्रवाई की गई है। उनके रिकॉर्ड में परनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने और उनकी तीन वेतन वृद्धियों को रोकने के निर्देश जारी किए गए हैं।

हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद मामले के सामने आने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पर संज्ञान लेते हुए तत्काल कड़ा रुख अपनाया था। मामले की प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं के संकेत प्राप्त हुए थे। इसके परिणामस्वरूप, तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह और पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी समेत कई अन्य अधिकारियों को निलंबित किया गया था। निलंबन के उपरांत, पूरे प्रकरण की विस्तृत और गहन पड़ताल विशेष जांच तथा ऑडिट के माध्यम से संपन्न कराई गई।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर कोई भी समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि शासन-प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही, दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

राज्य सरकार की यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के विरुद्ध अब तक की एक प्रमुख प्रशासनिक कार्रवाई मानी जा रही है। इस निर्णय से यह स्पष्ट संदेश गया है कि सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और पद के गलत उपयोग को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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