चंपावत

सड़क सुरक्षा अभियान तेज: 'गुड समेरिटन' योजना के तहत घायलों की मदद पर मिलेगा 25 हजार का इनाम

गीता जोशी (संपादक) · 25 जून 2026 | 05:11 pm

सड़क सुरक्षा अभियान तेज: ‘गुड समेरिटन’ योजना के तहत घायलों की मदद पर मिलेगा 25 हजार का इनाम
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चंपावत: सड़क परिवहन मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देशों और प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा सड़क हादसों को रोकने के लिए दिए जा रहे निर्देशों के तहत चंपावत जिले में जागरूकता अभियान को गति दी जा रही है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सड़क हादसों में घायल होने वाले लोगों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है, जिससे किसी भी जान की हानि को रोका जा सके।

इसके साथ ही, आम नागरिकों को बिना किसी भय के सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्तियों की सहायता के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी क्रम में, केंद्र सरकार द्वारा लागू ‘गुड समेरिटन’ (राह-वीर) कानून और योजना के बारे में जिले के निवासियों को जागरूक किया जा रहा है।

जिलाधिकारी के निर्देशों पर एआरटीओ टनकपुर (चंपावत) मनोज बगोरिया ने जानकारी देते हुए बताया कि ‘गुड समेरिटन’ या राह-वीर वह व्यक्ति होता है जो किसी भी व्यक्तिगत लाभ या इनाम की अपेक्षा के बिना, स्वेच्छा से सड़क हादसे में घायल व्यक्ति की मदद करता है और उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाता है।

इस कानून के अंतर्गत, मदद करने वाले व्यक्तियों को पूर्ण कानूनी संरक्षण प्राप्त है। सड़क हादसे में घायल की सहायता करने वाले व्यक्ति को पुलिस या अदालती कार्यवाही में उलझाया नहीं जाएगा। मदद करने वाले व्यक्ति की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी और पुलिस उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार करेगी। घायल को अस्पताल में भर्ती कराने के बाद, मददगार व्यक्ति को वहां रुकने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

सरकार की इस योजना के अंतर्गत, सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति की जान बचाने वाले मददगार (राह-वीर) को प्रत्येक घटना के लिए 25,000 रुपये नकद पुरस्कार और एक प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाता है।

इसके अतिरिक्त, पूरे वर्ष देश भर से चयनित उत्कृष्ट मददगारों को राष्ट्रीय स्तर पर एक लाख रुपये तक के बड़े पुरस्कार से सम्मानित भी किया जाता है।

एआरटीओ टनकपुर मनोज बगोरिया ने क्षेत्र के सभी निवासियों से अपील की है कि सड़क हादसे की स्थिति में घायल व्यक्ति की मदद करने में किसी भी प्रकार का संकोच न करें और न ही किसी बात का भय रखें, क्योंकि सरकार ने मददगारों को पूर्ण कानूनी सुरक्षा प्रदान की है।

उन्होंने बताया कि हादसे के तुरंत बाद का पहला एक घंटा, जिसे ‘गोल्डन ऑवर’ कहा जाता है, किसी भी घायल की जान बचाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस महत्वपूर्ण समय में यदि घायल को थोड़ी सी भी सहायता मिल जाए, तो उसकी जान बचाई जा सकती है।

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