नैनीताल

हल्द्वानी हत्याकांड: मामूली विवाद में दो जिंदगियों का खौफनाक अंत, चार आरोपी गिरफ्तार

मुख्य संपादक · 13 फ़रवरी 2026 | 06:51 am

Gemini Generated Image gy9tvogy9tvogy9t (1)
विज्ञापन (Top) · Ad Space

हल्द्वानी (नैनीताल): देवभूमि के शांत वातावरण को उस वक्त सनसनी ने घेर लिया जब हल्द्वानी की नवीन मंडी (गल्ला मंडी) परिसर में एक युवक और युवती की पत्थर से कुचलकर निर्मम हत्या कर दी गई। मृतकों की पहचान शुभम टम्टा और लक्ष्मी पोखरिया के रूप में हुई है, जो लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे थे। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस दोहरे हत्याकांड की गुत्थी सुलझा ली है और घटना में शामिल चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पार्टी के दौरान शुरू हुआ एक छोटा सा विवाद इतना बढ़ गया कि दोस्तों ने ही अपने साथियों की जान ले ली।

पूरी घटना और पृष्ठभूमि

घटना बुधवार रात की है। अल्मोड़ा के लोअर माल रोड निवासी शुभम टम्टा और ओखलकांडा की लक्ष्मी पोखरिया पिछले कुछ समय से हल्द्वानी में साथ रह रहे थे। बुधवार की रात वे अपने चार दोस्तों—गौरव नेगी, दीपू शर्मा, सौरभ भट्ट और दीपेश लटवाल के साथ गल्ला मंडी स्थित गोदामों की छत पर पार्टी करने गए थे।

पार्टी के दौरान शराब के नशे और किसी पुरानी या तात्कालिक बात को लेकर शुभम और अन्य दोस्तों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। यह बहस जल्द ही हाथापाई में बदल गई। विवाद इतना बढ़ा कि चारों आरोपियों ने मिलकर शुभम पर हमला कर दिया। उन्होंने पास में ही पड़े कंक्रीट के भारी ब्लॉक से शुभम के सिर पर ताबड़तोड़ कई वार किए। पोस्टमार्टम और पुलिस जांच के अनुसार, शुभम के सिर पर लगभग 10 बार प्रहार किया गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

गवाह मिटाने के लिए युवती की भी हत्या

इस पूरी खौफनाक वारदात की चश्मदीद लक्ष्मी पोखरिया थी। जब आरोपियों ने शुभम को मौत के घाट उतार दिया, तो उन्हें डर सताने लगा कि लक्ष्मी पुलिस को सब बता देगी। खुद को बचाने और साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से उन्होंने लक्ष्मी पर भी हमला कर दिया। कंक्रीट के ब्लॉक से उसके सिर पर भी दो-तीन बार वार किए गए, जिससे उसकी भी जान चली गई।

गुरुवार सुबह जब मंडी के पल्लेदारों ने गोदाम की छत पर खून से लथपथ शव देखे, तो इलाके में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही एसएसपी मंजूनाथ टीसी और पुलिस टीम मौके पर पहुंची। फॉरेंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाए और पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और मोबाइल लोकेशन के आधार पर आरोपियों की घेराबंदी शुरू की। देर शाम तक चारों आरोपियों को बरेली रोड और आसपास के क्षेत्रों से दबोच लिया गया।

कारण और परिस्थितियाँ

पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि इस हत्याकांड के पीछे कोई बड़ी साजिश नहीं, बल्कि नशे की हालत में उपजा ‘ईगो’ और मामूली विवाद था। आरोपियों ने बताया कि शुभम के साथ उनकी बहस हुई थी और बात बढ़ने पर उन्होंने आव देखा न ताव और हमला कर दिया। अपराध को छिपाने के लिए उन्होंने मृतकों के मोबाइल फोन साथ ले लिए और अपने खून से सने कपड़े पास की एक नहर में धोए ताकि पुलिस को कोई सबूत न मिल सके। मौके से पुलिस को शराब की खाली बोतलें, सिगरेट और खून से सने कंक्रीट के ब्लॉक बरामद हुए हैं।

जनता और समाज पर प्रभाव

इस घटना ने स्थानीय निवासियों और व्यापारियों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा कर दी है। मंडी जैसे व्यस्त और सार्वजनिक स्थल के गोदामों की छतों पर इस तरह की पार्टियाँ होना और फिर वहां हत्या जैसा जघन्य अपराध होना प्रशासनिक मुस्तैदी पर भी सवाल उठाता है। समाज में युवाओं के बीच बढ़ती नशे की प्रवृत्ति और बात-बात पर हिंसक हो जाने का रवैया एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है। इस हत्याकांड ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि कैसे चंद मिनटों का गुस्सा और नशा हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ देता है।

आगे क्या बदलेगा?

इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन मंडी क्षेत्रों और सुनसान गोदामों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्त कदम उठा सकता है। एसएसपी मंजूनाथ टीसी ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक स्थानों पर नशा करने वालों और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाएगी। मंडी समितियों को भी निर्देश दिए जा सकते हैं कि वे अपने परिसर में रात्रि प्रहरी और सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाएं ताकि अपराधियों में कानून का भय बना रहे।

आम आदमी पर असर और सबक

एक आम नागरिक के लिए यह खबर एक चेतावनी की तरह है। दोस्तों के चुनाव में सावधानी और नशे जैसी बुराइयों से दूरी बनाए रखना जीवन की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। माता-पिता और अभिभावकों के लिए भी यह जरूरी है कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों और उनकी संगत पर नजर रखें। कानून की दृष्टि से देखा जाए तो पुलिस की त्वरित गिरफ्तारी ने जनता में विश्वास जगाया है कि अपराधी चाहे कितनी भी सफाई से साक्ष्य मिटा ले, कानून के हाथ उन तक पहुँच ही जाते हैं।

निष्कर्ष (जनहित के नजरिए से)

हल्द्वानी का यह दोहरा हत्याकांड केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि सामाजिक पतन का संकेत है। आवेश में आकर किए गए कृत्य का परिणाम उम्रकैद या फांसी की सजा हो सकता है, जो न केवल अपराधियों का भविष्य बर्बाद करता है बल्कि पीड़ितों के परिवारों को कभी न भरने वाले जख्म दे जाता है। प्रशासन को चाहिए कि वह ऐसे संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ाए और जनता को भी जागरूक होना होगा कि यदि वे कहीं भी संदिग्ध गतिविधि देखें, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।

विज्ञापन (Middle) · Ad Space
शेयर करें:WhatsAppFacebook
विज्ञापन (Bottom) · Ad Space

संबंधित ख़बरें